Durganandan

Durganandan
blog image

स्मृति कलश

असमय ही छलक पड़ता है स्मृति कलश, गिरती है बूँदें आरक्त कपोलों पर। कभी तप्त था जो तुम्हारे स्पर्श से, अब तुम्हारी स्मृति से शीतल।